हिंदी वर्णमाला की आध्यात्मिक शक्ति -
हिंदी वर्णमाला में कुल ५२ अक्षरों का समावेश है, जिसमें साधारणतयः १३+३= १६ स्वर एवं ३६ व्यंजन होते हैं, जो हम सभी जानते हैं, किन्तु हिंदी वर्णमाला के आध्यात्मिक रहस्य का रूप कुछ अलग ही है।- मातृका में ५२ अक्षर बताये गए हैं, जिसमे सबसे प्रथम अक्षर, सृष्टि का निर्माणक ओंकार है, इसके उपरान्त १४ मनुस्वरूप स्वर (Vowels), ३३ देवता स्वरुप व्यंजन (Consonants) तथा शेष ४ क्रमशः अनुस्वार, विसर्ग, जिह्वामूलीय व उपध्मानीय, यही सब मिलकर ५२ मातृका वर्ण माने गए हैं। इन्ही मातृकाओं का सार सर्वस्व बताया गया है।
व्याख्यात्मक वर्णन - प्रथम अक्षर ॐ (ओंकार) के बाद १४ मनुस्वरूप स्वर हैं - स्वायंभुव, स्वरोचिष, औत्तम, रैवत, तामस, चाक्षुष, वैवस्वत, सावर्णि, ब्रह्मसावर्णि, रुद्रसावर्णि, दक्षसावर्णि, धर्मसावर्णि, रौच्य एवं भौत्य। ३३ व्यंजन रुपी देवता क्रमशः -
- अक्षर 'क' से 'ठ' तक कुल १२ आदित्य (द्वादश सूर्य के लिए मेरा दि० १६ फरवरी,२०१४ का ब्लॉग देखें),
- अक्षर 'ड' से 'ब' तक कुल ११ रूद्र (कपाली, पिंगल, भीम, विरुपाक्ष, विलोहित, शास्ता, अजपाद, अहिर्बुधन्य, शम्भु, चण्ड, भव),
- अक्षर 'भ' से 'ष' तक कुल ८ वसु (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, सूर्य, चंद्र, ध्रुव/ नक्षत्र/ ईशान) तथा
- अंत के अक्षर 'स' और 'ह' २ अश्वनी कुमार हैं।
- ४ जीव क्रमशः जरायुज, अंडज, स्वेदज, उद्भिज्ज/ अनुस्वार, विसर्ग, जिह्वामूलीय, उपध्मानीय।
कुल योग - प्रथम ॐ + १४ स्वर + ३३ व्यंजन + ४ जीव = ५२ अक्षर
इस प्रकार हिंदी वर्णमाला के ५२ अक्षरों का आध्यात्मिक स्वरुप स्कन्द पुराण में वर्णित है।
- स्कन्द पुराण-कुमारिकाखण्ड (पृष्ठ सं १००,१०१)
Nice blog....
जवाब देंहटाएंShukriya Bhai...
हटाएं