शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2014

Ganesha Gayatri Mantra & Twelve names of Lord Ganesha

एक बुद्धिमान मनुष्य पृथक पृथक तरीकों व नामों से विघ्नविनाशक, प्रथमपूज्यनीय भगवान् गणेश का पूजन व जप करता है। गणेश पूजन के कुछ महत्वपूर्ण मंत्र निम्नवत हैं -

गणेश गायत्री मंत्र - 

ॐ महाकर्णाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्। 


गणेश पूजन करने व जप करने योग्य अन्य मंत्र -

१. ॐ गणाय नमः

२. ॐ गणपतये नमः

३. ॐ कूष्माण्डकाय नमः

४. ॐ गं गणपतये नमः

५. ॐ गः स्वाहा (प्रणव युक्त मूल मंत्र)

शिव - पार्वती पुत्र व गणो के अधिनायक प्रथमेश भगवान गणेश के बारह नाम इस प्रकार हैं - 

            गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बकः।
            नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्नराजकः।।
            धूम्रवर्णो भालचन्द्रो दशमस्तु विनायकः।
            गणपतिर्हस्तिमुखो द्वादशारे यजेड्गणम् ।।


विधि विधान व सच्चे मन से गणपति देव का स्मरण तथा उनकी पूजा करके व्रत, जप एवं हवन करने से विद्द्या एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। खाण्ड के लड्डू व मोदक का प्रसाद भगवन गणेश को अत्यंत प्रिय हैं। भगवान् को उनका प्रिय भोग भेंट स्वरुप देने से मनुष्य की सभी कामनाएं पूर्ण होती हैं व सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

- गरुड पुराण (आचार काण्ड-२१९)


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