प्रिय पाठकों,
सादर प्रणाम !जैसा कि आप जानते व समझते हैं कि चौरासी लाख योनिओं में श्रेष्ठ मानव योनि है तथा धर्मों में सर्वश्रेष्ठ धर्म मानव धर्म है। हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, पारसी, जैन व बुद्ध आदि सभी धर्म मानवता को एक ही सन्देश देते हैं कि आपस में प्रेम करो तथा एक दुसरे की मदद करो।
उपरोक्त पंक्ति का वास्तविक व गूढ़ रहस्य हिंदी भाषा के "भगवान्" शब्द के शाब्दिक अर्थ से स्पष्ट हो जाता है। सामान्यतः हम "भगवान्" को केवल हिन्दुओं के लिए प्रयोग करते हैं। अन्य संप्रदाय के लोग अपनी -अपनी भाषा में अलग -अलग नामों से पुकारते हैं। जबकि आपको जानकर अचम्भा नहीं होना चाहिए कि इन्सान भगवान् का ही रूप है, हर इन्सान में भगवान् का वास है, बल्कि हर प्राणी अपने आप में भगवान् है। बस थोड़ा सा सोच-विचार करने की जरूरत है, जैसे -
भ - भूमि / धरती
ग - गगन / आकाश
व - वायु / हवा
अ - अग्नि / प्रकाश
न - नीर / पानी
आप और हम भली प्रकार जानते हैं कि प्राणी की संरचना प्रकृति के पाँच तत्वों से मिलकर हुई है - धरती, आकाश, वायु, आग व पानी। प्रकृति के यह पाँचों तत्व हमारे मानव शरीर में पूर्ण रूप से निहित हैं, जोकि "भगवान्" शब्द का वास्तविक अर्थ भी स्पष्ट करते हैं।
अंततः हमारे कहने तात्पर्य इतना मात्र है कि आप किसी भी धर्म अथवा रूप में ईश्वर को पाना चाहते हैं तो सर्वप्रथम इंसानियत को समझने का प्रयास करें तथा प्रत्येक मानव / इन्सान / प्राणी से प्रेम करें, क्योंकि हमारे वास्तविक पूजनीय "भगवान्" तो हर जगह हैं, हर प्राणी में हैं, बल्कि हमारे ही अंदर हैं।
हम सब एक ही परम पिता परमेश्वर की सन्तान हैं व एक समान हैं
!! सबका मालिक एक !!
Best interpretation of God. No words i have to comment, all i can say that a big thanks to you for sharing your most valuable view to world :)
जवाब देंहटाएंApplause...!!
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