गुरुवार, 13 फ़रवरी 2014

Meaning of Gayatri Mantra

गायत्री मन्त्र

! ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यम् भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नह प्रचोदयत् !

भावार्थ

उस प्राण स्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अन्तरात्मा में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।     
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ईश्वर दण्ड नहीं देता, कर्म की प्रतिक्रिया अन्यायी को दण्ड देती है। 
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मानव मात्र को उज्जवल भविष्य प्रदान में सक्षम गायत्री महाविद्या सबके लिए सुलभ, सबके लिए साध्य, सबके लिए हितकर है। इसे समझें, अपनायें, साधें और अनुपम लाभ उठायें।      
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विविध सम्प्रदायों में गायत्री मंत्र का अर्थ - 


हिन्दू :- ईश्वर प्राण स्वरूप, दुःख नाशक, सुख स्वरूप है। हम प्रेरक देव के उत्तम तेज का ध्यान करें, जो हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए पवित्र प्रेरणा दे। 

इस्लाम :- हे अल्लाह! हम तेरी ही वंदना करते तथा तुझी से सहायता चाहते हैं। हमें सीधा मार्ग दिखा। उन लोगों का मार्ग, जो तेरे कृपा पात्र बनें, न कि उनका जो तेरे कोप भाजन बने तथा पथ भ्रष्ठ हुए। 
     
सिक्ख :- ईश्वर एक है, उसका नाम सत्य है। वह सृष्टि कर्ता, समर्थ पुरुष, निर्भर, निर्बैर, जन्म रहित तथा स्वयं भू है। वह गुरू की कृपा से जाना जाता है।  

ईसाई :- हे पिता हमे परीक्षा में न डाल, परन्तु बुराई से बचा, क्योंकि राज्य, पराक्रम तथा महिमा सब तेरी ही है।     

जैन :- अईहतों को नमस्कार, सिद्धों को नमस्कार, आचार्यों को नमस्कार, उपाध्याओं को नमस्कार तथा सब बन्धुओं को नमस्कार।     

बौद्ध :- मैं बुद्ध कि शरण में जाता हूँ। मैं धर्म की शरण में जाता हूँ। मैं संघ की शरण में जाता हूँ। 

पारसी :- वह परम गुरू (अहुरमज़द) परमेश्वर अपने ॠत व सत्य के भंडार के कारण राजा के समान महान है। ईश्वर के नाम पर किये गए परोपकारों से मनुष्य, प्रभु प्रेम का पात्र बनता है।  

-- वेदमूर्ति पं० श्री राम शर्मा आचार्य,
शांतिकुंज, हरिद्वार



"जो उपासक प्रातःकाल उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर नित्य गायत्री मंत्र का जप करता है, वह कमलपत्र की भाँति पाप से संलिप्त नहीं होता। "   
- गरुड पुराण (आचार काण्ड - ३७५)

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हरि।  ओइम।  तत्सद। 

माता - पिता के श्री चरणों में सादर प्रणाम
गुरू के श्री चरणों में सादर प्रणाम
ईष्ट देव को साष्टाँग प्रणाम
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यहाँ से मेंरा ब्लॉग आरम्भ होता है। आप सभी पाठकों से हार्दिक आशीर्वाद की अभिलाषा में आपका अपना -

- अभिषेक कुमार "चित्रांश"
सी० बी० गंज, बरेली
उत्तर प्रदेश
चलभाष # 09897111313

2 टिप्‍पणियां:

  1. It seems so nice to read so many dimensions of Gayatri mantra. one line is truly memorable..ईश्वर दण्ड नहीं देता, कर्म की प्रतिक्रिया अन्यायी को दण्ड देती है।

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